shyam temple closed till 31 march

बाबा श्याम के मंदिर के पट 31 मार्च तक बंद - कोरोना को देखते हुए खाटूश्याम मंदिर ट्रस्ट ने बड़े फैसले किए हैं। शनिवार से ही खाटू मंदिर के पट बंद हो जाएंगे। खाटू मेले का समापन शुक्रवार को होगा।

मंदिर की तरफ से कहा गया है कि जिन्होंने 27 मार्च के लिए रजिस्ट्रेशन कराए हैं, वे 26 मार्च को ही दर्शन करने आ सकते हैं। मंदिर की वेबसाइट रजिस्ट्रेशन के लिए अब बंद कर दी गई है।

पहले सिर्फ होली व धुलंडी पर मंदिर पट बंद रखने का फैसला किया गया था। अब कोरोना और सरकार की गाइडलाइन की वजह से 31 मार्च तक मंदिर पट बंद रखने का फैसला किया गया है।

श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शंभु सिंह चौहान ने बताया कि कोविड के प्रभाव के चलते इस होली-धुलंडी के पहले से ही बाबा श्याम का मंदिर श्रद्धालु़ओं के दर्शनाथ बंद हो जाएगा।

एक अप्रैल से भी मंदिर खुलेंगे या नहीं, इसको लेकर बाद में फैसला होगा। शनिवार से मंदिर को भी सेनेटाइज करना शुरू कर दिया जाएगा।

हर बार एकादशी पर 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु, दर्शन के लिए 5 सैकंड मिलते हैं, इस बार 9 हजार ही आए इसलिए जी भर किए दर्शन

कोरोनाकाल की पाबंदियों के बीच कुछ चीजें श्रद्धालुओं को सुकून देने वाली भी नजर आई। बाबा श्याम के दर्शन कर लौटने वाले श्रद्धालुओं के बीच इनकी चर्चा होती रही।

लंबे समय बाद लक्खी मेले में श्रद्धालुओं को करीब 30-40 सैकंड तक बाबा श्याम का दीदार करने का वक्त मिला। क्योंकि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल की तुलना में काफी कम थी।

पिछले साल एक श्रद्धालु को श्याम दर्शन के लिए महज 5 से 10 सैकंड का वक्त मिला था। कोरोनाकाल में मेले के दौरान कोविड रिपोर्ट और ऑनलाइन पंजीकरण की अनिवार्यता के बीच इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बेहद सीमित रही।

एकादशी पर गुरुवार को बाबा श्याम नगर भ्रमण के लिए कोरोनाकाल में भी शाही ठाठ-बाट से निकले। श्रद्धालु बाबा की रथ यात्रा के वैभव व भक्ति के रंग और उल्लास में डूबे नजर आए।

रथ यात्रा की सबसे खास होता है सिक्कों के जरिए बाबा श्याम की नजर उतारना और इन्हीं सिक्कों (जिन्हें भक्त खजाना भी कहते हैं) को लूटने की जबरदस्त होड़ लगती है।

एकादशी पर 9 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दरबार में हाजरी लगाई। यह पिछले साल की तुलना में बेहद कम है। 2020 में एकादशी पर 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे थे। इस बार 16 किमी का जिगजैग भी चालू नहीं करना पड़ा।

श्याम मंदिर कमेटी के सदस्य प्रतापसिंह चौहान कहते हैं, मेले को करीब 330 साल हो गए। तभी से सिक्कों से श्याम की नजर उतारने की परंपरा चली आ रही है।

रथ के जरिए मंदिर और श्रद्धालुओं की तरफ से सिक्के बाबा पर वारकर उछाले जाते हैं। इसी खजाने को आशीर्वाद के तौर पर भक्त पाने की होड़ में लग जाते हैं। जिस भक्त को जितने सिक्के मिलते हैं, वह खुद को उतना ही मालामाल समझता है।

Source - Neemkathana Bhaskar, 26 March 2021

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